PollsticsPOLLSTICS
POLLSTICS

चुनावी चंदे की नई राह: राजनीतिक दलों की फ़ंडिंग में कितनी पारदर्शिता?

चुनावी चंदे को लेकर नए खुलासों ने राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मौजूदा नियम पर्याप्त हैं, या सुधार की अब भी ज़रूरत है?

पोलस्टिक्स संवाददाता
9 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट में पढ़ें
चुनावी चंदे की नई राह
प्रतीकात्मक तस्वीर

राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का सवाल भारतीय लोकतंत्र में लंबे समय से बहस का विषय रहा है। चुनावी बॉन्ड योजना रद्द होने के बाद यह उम्मीद की गई थी कि राजनीतिक फ़ंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।

पोलस्टिक्स ने पिछले तीन वित्त वर्षों में प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई योगदान रिपोर्टों का अध्ययन किया।

विश्लेषण से पता चलता है कि दलों की कुल आय का बड़ा हिस्सा अब भी अज्ञात स्रोतों से आता है, जिनकी जानकारी सार्वजनिक करना क़ानूनन ज़रूरी नहीं है।

दस्तावेज़ क्या बताते हैं

दस्तावेज़ों के मुताबिक़ कई दलों ने इलेक्टोरल ट्रस्ट के ज़रिए बड़ी रक़म हासिल की।

चुनाव सुधार पर काम करने वाले संगठनों का कहना है कि नक़द चंदे की सीमा और घटाई जानी चाहिए।

"जब तक चंदे का स्रोत सार्वजनिक नहीं होगा, तब तक मतदाता यह नहीं जान सकता कि नीतियाँ किसके हित में बन रही हैं।"

— एक चुनाव सुधार विशेषज्ञ

इस रिपोर्ट के लिए हमने सभी प्रमुख दलों से प्रतिक्रिया माँगी।

पोलस्टिक्स इस विषय पर अपनी पड़ताल जारी रखेगा।

चुनावी चंदाचुनाव आयोगपारदर्शिताराजनीतिक दल

ये भी पढ़ें

संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कितनी सुरक्षित?

संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कितनी सुरक्षित?

4 घंटे पहले
सरकारी योजनाओं की ज़मीनी हकीकत: लाभार्थियों की क्या है राय?

सरकारी योजनाओं की ज़मीनी हकीकत: लाभार्थियों की क्या है राय?

6 घंटे पहले
संसद का शीतकालीन सत्र: विपक्ष के तेवर और सरकार की रणनीति

संसद का शीतकालीन सत्र: विपक्ष के तेवर और सरकार की रणनीति

8 घंटे पहले
सूचना के अधिकार पर नए प्रस्ताव से उठे सवाल

सूचना के अधिकार पर नए प्रस्ताव से उठे सवाल

12 घंटे पहले